Horror story in forest || जंगल में भूत के कहानी

 Horror story in forest || जंगल में भूत के कहानी

कहानी जो मेरे दादा जी मुझे बताया था उस समय की है,जब दादाजी उनके परिवार के साथ गांव में रह रहा था,उनके उमर 10 से 12 साल का था।जिसके साथ यह घटना हुई है वो फलियारी गांव का रहने बाला ।फलियारी गांव से लेकर शचटपुर पूरा काला जंगल छाया हुए हे ।ये यूपी में पड़ते हे इस जंगल मै न जाने कितने भयानक जानवर ओर भूत प्रेत चुड़ेल  आत्मायं रहती है।इस बार मै फलियारी में दिवाली पर उस गायों में गया था ।वहां के लोग उस जंगल के बारे मँ बताते रहते है कि इस जंगल मै आत्माएं भूत-प्रेत रहते हैँ।तो मुझे तो वेसे भी भूत- प्रेतो पर विश्चाश है शायद अपलोग को यकीन हो भी सकते हे या नही ।15 अगस्त को अपने दादा जी बड़े भाई के  साथ कॉलेज गेया था। वहां के लोग उन्हं शंकर कहके पुकार ता हे ।दादाजी बोल रहे थे15 अगस्त का प्रोग्राम खत्म होते ही हम लोग जाने ही वाले थे की वहां के पडोसी ने उन्हं घर पर खाने के लिए  हम लोगोंको  बुलाया तब हम लोग उनके घर खाना खाए ।फिर एसे ही बातं हो रही थी! तब उन्होंने अपनी आप बीती कहानी बताई कि अभी कुछ दिनों पहले मेरे बेटे समीर के साथ एसी घटना घटी है।की आप को क्या बताएं समीर के पिताजी ने बताया की एक दिन मेरी तबियत खराब हो गयी थी। तब मैने समीर को जंगल से बकरियों के लिए चारा लाने के लिए भेज दिया था।समीर वेसे तो कभी कभी जंगल जाता था पर वो हमेशा काम चुराता था।पर आज उसे मजबूरी मै जंगल जाना पड़ा वो रास्ते मँ चलता गया उसे कहीं भी पास में बकरी का खाना  नहीं मिला क्योंकि पास के सारे पेड तो पहले से ही बकरियो के लिए काट चुके थे।वो जंगल के ओर अंदर चला गया वो घने जंगल म पहुंच गेया जहाँ पर बहुत पास-पास पेड खड़े हुए थे। पेड इतने घने थे कि आसमान तो नजर ही नहीं आ रहा था।बरसात का मौसम था अच्छी बरसात हो गयी थी तो पूरा जंगल हरा भरा सा था ।पत्थरो पर पानी एसे बह रहा था जैसे साफ़ कोई झरना बह रहा हो। पहाड़ों से नीचे की ओौर आता हुआ पत्थरों पर साफ़ पानी बह रहा था वहां पर इतनी शीतलता थी की उसकी देखते ही थकान दूर हो जायेगा, उसने सोचा की पहले मँ थोडा आराम कर लूँ फिर मैं पत्तियां काट कर घर ले जाऊँगा थोडी देर ही हुई थी ,उसे सोये हुए उसने सपना देखा कि वह चारे के चक्कर मँ बहुत दूर आ गया है ओर वह रास्ता भूल गया है।उसने सपने में देखा कि उसके सामने कोई खडा है उसकी शक्ल देखते ही उसकी होस उर्गेया  ओर वह नींद से उठ पड़ी अब उसे  डर लगने लगी कहा अगेया,जल्द बाजी में अब चारा तो काट रहा था।पर वह सपने की बात याद करके बहुत डरी हुई थी।उधर सूरज भी ढलने वाला था।उसके सामने दूर-दूर तक किसी की भी दिखाई तो केया आवाज भी सुनाई नहीं दे रही थी। वह जल्दी जल्दी पत्तियां काट ही रहा था,तब उसे कुछ आवाजे शुनाई दिया कही आपस में बाते कर रहे थे। एक बार सुनाई दिया फिर चुप हो गेय। उसने सोचा कोई आदमी होगा तो मैँ उसी के साथ घर चला जाऊँगा उसने जल्दी से पत्तियां बांधी ओौर वह आवाज आ रही थी उधर की ओर चल दिया पास पर उसने यह ध्यान नहीं किया की वो आया किधर से है ओर किधर जा रहा है। वह उल्टा जंगल मैँ घुसता चला गया आवाज ओर साफ़ सुनाई देने लगी तो वह ओर आगे बढ़ा उसने देखा कि दो लोग आपस मै बातें कर रहे हँ ओर उनकी पीठ दिखाई दे रही है उसने उनके पास जाकर बोला क्या तुम मुझे घर जाने का कोई छोटा रास्ता बता सकते हो? इतना उसने कहते ही वो दो लोग उसके सामने से एसे गायब हो गेया  कि वहां कोई था ही नही । उनके गायब होते ही उसके सारा शरीर कांपने लगा और हात पैर जैसे किसीने बाध दिया,उसके चलने का क्षमता चले गेया, वह बेहोश हो गया ,कुछ समय की लिए बारिश हो गेया और उसका होस ठीक हो गेया, होश आया तो वह देखा है कि इसके सामने सपने वाला आदमी  खडा है बड़ी-बड़ी लाल आंखें दांत बहार निकले उसका पैर जानोवर की तरा, ऊपरसे नीचे तक इतना भयानक कि वह उसे देख के भागने लगा, जितना भागा जंगल के अंदर में घुसते चला गेया। उसे लगा कि अब नहीं बचने वाला हे, उसके तो  जिंदा रहेगा या नही उसके उम्मीद चला गेया, जंगल अंदर जाते ही उस आदमी ऊहा से गायब हो गेया। जहा पर जाके पोउचा बोह़ा पर दूसरा  भूत प्रेतों का डेरा लगा हुए। उस दृश्य को देख कर समीर पागल हो गया । उसके होश ठिकाने नहीं थे! वह वहीं पर गिर पड़ा इधर घर वालों को चिंता हो रही थी कि अँधेरा हो गया समीर अभी तक क्यों नहीं आया उसके बड़े भाई ने कहा कि अभी आता ही होगा,गांव के लोगों को पता चल गया था समीर जंगल में बकरी के लिए खाना लाने गई अभी तक घर नही लटा हे। सब लोग जब इंतजार करके थक चुके थे रात के १० बज चुके थे। अब उसके भाई को लगा शायद कुछ बड़ा सा मुसीबत हो गेया ।कुछ लोगो ने कहा चलो देखते  है ,क्या पता इतने बड़े जंगल मै कुछ हो गया होगा, सब लोग लाठी,कुठारी टार्च लेकर उसे ढूंढने निकल पडे। उसका भाई अपाहिज था वह एक पैर चलता था!इसलिए उसके पिताजी नै कहा बेटा तू यहीं रह अपनी माँ ओर बहन के पास हम लोग जाते हैँ ,तेरे भाई को धुंडके निकल कर लेके आयेंगे। जंगल के तोडा अंदर जाके  देख  लिया लिकिन समीर का कुछ पता नही चला । सब लोगों ने कहा कि अभी घने जंगल मै जाना ठीक नहीं है। अभी सुबह होते ही चलेगे अभी ३ बजे है और २ घंटे मै सुबह हो जाएगी सब लोगों ने वहीं बैठ कर सुबह का इंतजार करने लगे ,थोड़ी देर बाद सुबह हो गयी सब लोगो नै कहा चलो अब चलते हैँ सब लोग चल दिए आवाज लगते हुए समीर- समीर पर समीर का कुछ आता पता नही मिला । दिन हो गए समीर का कहीं पता नहीं चला अब सब लोग परेशान थे।उधर समीर का भाई बहुत व्याकुल था बेचारा कुछ कर तो नहीं सकता था।वह जाकर अपने घड़के मंदिर में भगवान के पास रो रहा था ओर कहने लगा मेरा भाई लटा दो । उसके घरमे भगवान नरसिंह देव का पूजा कर रहे थे और वो हर दिन भगवान को धूप और भोग चढ़ा रहे थे।उसे अपने भगवान के ऊपर आस्था और अटूट विश्वास था।उसको मन में थाम लिया था उसका भाई जितना बड़ा मुसीबत में हो ना क्यूं भगवान उसके रक्षा करेगा। दो दिन से समीर ला पता,किसको पता समीर का क्या हूया हे।इधर समीर अपने जिंदगी से लड़ाई कर रहा था।समीर को उन भूतो ने घेर रखा था ।अचानक जंगल के बीच कही सेर की दहाड़ नेका आवाजे आई और उसी समय समीर का होस ठीक हो गया और बो आगे और दौर ने लगी ,सामने जाके एक नदी जाके गिरा।नदी के स्रोत में कुछ दूरी पर तहर कर आगेया तब उसको कुछ लोग दिखाई दिया ।समीर दूसरे गांव में आके पूछा ,जब गांव के लोगों को बताया तब उसको खाना खिलाया फिर गांव का कुछ लोग मिलके समीर के गांव में लेके आया । सायेद नरसिम्हा देव ने पुकार सुन लिया था उसी ने किसी सेर के रूप में समीर को बचा लिया।समीर घर में आके सारे बात बताई उसके साथ क्या हुए। क्या बताऊँ उस रात की बाते याद करके मै अभी भी डर जाता हूं वहां पर इतने भूत एक साथ मैने क्या किसी ने सपने मै भी नहीं देखे  किसी की गर्दन अलग कोई बिना ओंँख कान कोई डांचा मेरे चारों तरफ तांडव कर रहे थे। मै कभी जिन्दगी मैँ सोच नहीं सकता की एेसा दिन भी आएगा।एेसी तरह-तरह की आवाज निकाल रहे थे सारा जंगल उनकी आवाज से गुज रहा था।मुझे लग रहा था की मँ अब बचने वाला नही हूं। लगता है यह लोग मुझे मार डालेंगे मै तो इतना डरा हुआ था की मैँ रो रहा था और में पागल सा हो गई।तब अचानक सेर ने पीछा किया और में नदी में आके गिर पारा।समीर के बड़े भाई की भगवान के प्रति श्रद्धा और बिस्वास के कारण  के ही आज समीर घर लटा हे।घर आते ही जैसे काले साया टल गई गांव बाला ने उसी समय बोल दिया अब से जंगल में कही अकेला नही जायेगा और गांव के अंदर नरसिंह देव का मंदिर होगा और हर साल मेला लग बया जायेगा।ऐसा बात सुनकर मेरा रोम रोम में सिहरन लग गई हमने दादा जीके पकड़ लिया डर के बजाय। मैने बहुत बार सोचा उस गांव में जाने के लिए सायेड उस गांव अभी उन्नत हो गया।

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