Kali Zinda Dayen Ki kahani || काली जिंदा डायन की कहानी

 

Kali Zinda Dayen Ki kahani || काली जिंदा डायन की कहानी

यह कहानी एक डायन की है! काली डायन इस कहानी का नाम हे दोस्तों मैंने यह कहानी बनाकर नहीं लिखी यह मेरे मोसी के बेटे ने मुझे सुनाई उसको उसके दादी ने बताई थी दादी के गांव में ऐसा घटना हुए थी गांव का नाम था बंशाल, छत्रृषगर डिस्ट्रिक। कुछ  लोग् का मानना है की भूतों का मन तन  होता है! आप लोग जानते हैं भगवान्‌ का अस्तित्व होता है है! तो भूतों का क्यों नहीं सभी ने रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों मैं पढ़ा या किसी से सुना होगा की भगवान्‌ जब इस धरती पर थे तब भी भूत पिशाच हुआ करते थे भगवान्‌ निराकार है! निराकार का अर्थ होता है जिसका कोई आकर नहीं होता जो लोग जिस रूप मैं भगवान्‌ को पूजते हैं भगवान्‌ उसी रूप मैं उसे दिखाई देते हैं ! तो प्रेम से बोलिए भक्त और भगवन की जय और समय ब्यर्थ न करते हुए मैं आपको अपनी कहानी की और ले चलता हूँ बहुत पुरानी बात है तब पानी के ज्यादा शाधन नहीं हुआ करते लोग कुए बाबड़ी तालाब आदि से पानी पिया करते थे! तो यह कहानी भी एक तालाब की है! जो कि उस काली डायन के बजाय से अमृत से ज़हर बन गया था! यह डायन कैसे बनी कैसे इस तालाब का पानी विष बन गया मैं यह कहानी आपको बताता हूँ!एक गाँव मैं एक औरत के कोई बच्चा नहीं था! वह औरत गांव के मुखिया की पत्नी थी उसके शादी को काफी समय हो गया था! सब लोग उसे बाँझ कहा करते थे! सारे गाँव वाले उसका मुंहभी नहीं देखना कहते थे कहते थे कि इसका मुंह देख लिया तो पूरा दिन बेकार चला जायेगा पर मुखिया कि पत्नी थी इसलिए लोग थोड़ी बहुत बात चीत कर लिया करते थे! एक दिन गांव मैं एक फकीरा बाबा भिक्षा मांगते हुए आ पहुँचता है तो वह बतों ही बातों मैं उसका हाथ देखने लग गई है! और कहता है आपको बच्चानहीं है ना वह बोली आपको कैसे पता चला वह बोला हम हस्त रेखा मैं निपुण  है और हाथ देखकर यह बता सकते हैं कि कया होने वाला है क्या होगा वह बोली अच्छा तो यह बताओ कि मेरे बच्चा कब होगा तो उसने कहा आपको भगवान्‌ ने बच्चा तो नहीं दिया पर मैं एक रास्ता बताता हूँ!वह सुनो अमावस्या की रात को किसी एक ऐसे लड़के कि बलि पीपल के पेड़ के नीचे दो! जो अपने माँ बापके एकलोता पुत्र हो और उसके खून से अपने बाल धोना फिर कहना ए प्यासी आत्माओ यह बलि मेरी तरफ सेस्वीकार करो और मुझे एक पुत्र दे दो! एक लोटे मैं उस कुए का पानी भर कर उस मैं उसके सरीर की दो बून मिला कर खुद पी लेना और उस लड़के के सिर के बाल अपनी साडी की गांठ मैं बंधे रखना तो तुमको अवस्य एकपुत्र पैदा होगा। इतना कहकर वह वहां से चले गया! उस दिन के ठीक तीन दिन बाद अमावश्या थी उस औरत ने वही किया जो उस बाबा ने बताया था उसने अपने देवरानी के लड़के कि बलि दे दी और खून  की दो बूंदे पानी मैं मिलाकर खुद पी लिया और उस सिर के कुछ बाल को काटकर अपनी गांठ मैं बांध लिया औरबिना पीछे मुड़े अपने घर आ गयी सुबह गांव बालों को पता चला कि मुखिए के भाई के बेटे को किसी ने मार के वहां फेक रखा है जब यह बात मुखिए और उसके भाई ने सूनी तो वह नंगे पैर दौड़ पड़े धीरे धीरे सारा गांव इकट्ठा हो गया उस लड़के की माँ का रो रो दिल का दौरा पड़  गया था! गांव की पंडित ने साला दिया इस लाश को पानी में फेक देने के लिए ।तब किसी व्यक्ति ने  उस सिर को धड से जोड़ा और उसे नदी में फेक दिया। सब लोग यही कह रहे थे गांव में कुछ बड़ा मुसीबत आने बाला हे । किसने किया यह सब कैसे हुआ सब लोगों केलिए यह घटना चिंता का विषय बन गयी थी।जब मुखिया घर पहुंचा तो देखा  है  उसकी पत्नी खाना बना रही थी वह बड़ी खुश नज़र आ रही थी। मुखिया ने क्रोध मैं कहा क्या तुम्हे इस बात का बिलकुल भी दुःख नहीं है की हमारे भाई का बेटा मर गया है ,वह पहले ऐसी नज़रों से देखी जैसे की उसे मार ही डालेगी फिर कहने लगी लड़का उसका मरा है मेरा नहीं मरा, क्यों शोक मनाऊँ और हसने लगी और कहने लगी तुम पागल हो तुम्हे तो खुस होना चाहिए की अब तुम्हारे भी एक पुत्र आने वाला है ,और यह जान कर और खुश होगी की वह इस जायदात का अकेला वारिस होगा हां हां हां। वह फिर ऐसे हसी यह देखकर मुखिया से रहा नहीं गया और उसे जान से मारने के लिए तलवार उठाने चला गया वह अन्दर तलवार ढुंढ रहा था पर तलवार नहीं मिली! जब वह पत्नी के के पास पहुंचा तो देखा  है की सारे कपडे खून से लथपत हैं और तलवार भी वही पडी है और उस पर खून लगा है वह यह सब देखते ही समझ गया की यह सब इसने पुत्र प्राप्ति के लिए बलि दी है । उसने उसे मारने का विचार बनाया की अभी मैं इसको मार दूंगा तो सब लोग मुझे गलत समझेंगे! और वह घर से चला गया उस दिन से गाँव मैं ऐसी ऐसी घटना होने लगी किसी की भैंस को किसीने मार दिया ,किसका बच्चे गायब, किसी ने उसे मार डाला और उस के सरीर के अंग इधर-उधरफैले पड़े जैसे की किसी ने उसे नोच नोच कर खाया। किसी दिन किसी का कुत्ता मरा हुए, किसी का बछडा तो किसी की बकरी मर गयी और उसी तरीके से वह मर रही थी जिस तरीके भैंस को किसीने मारा था ऐसी घटना से सारा गांव परेशान था ।किसी को यह समझ नहीं आ रहा था की आखिर हो क्या रहा है! एकदिन की बात है मुखिया रात को अपने गेट के पास सोया हुआ था आधी रात के समय उसे गेट खुलने की आवाज आई वह जाग गया उसने देखा की एक औरत बाल फिकरे हुए आधी रात को बहार चली जा रही है देखने में तो ऐसा लग रहा था की कही काली शक्ति  जैसे उसको कोई खींच कर ले जा रहा हो! भाद्र(अगस्त) की काली रात थी चरों तरफ से आवाजें आ रही थी कही शियार तो कहीं कुत्ते भोकते ऐसा लग रहा था उसे की जैसे यह  कही घोर काली साया इस गांव को घिर लिया। रात में ना जाने क्या होने बाला हे! अचानक उसे एक गाय के बछड़े के चिल्लाने की आवाज आई वह समझ गया हे यही सारे गांव की बर्बादी का कारन हैं! मुखिया के दिमाग मैं एक आइडिया आया की क्यों न मैं चलकर देखूं की यह कहाँ जाती है! वह उठ कर चलने लगे  उसने आगे चल  देखा कि पड़ोसी के गाय का बछड़ा का कटा हुआ मुंड पडा है और उसके धड को कही काली सी अरत उसको खा रही थी,मुखिया के दिमाग में एक बार भी नही आया हे उसके पत्नी ऐसा कर सकते हे,बो सोचा कही दूसरा  अरत हे। मुखिया ये सब देख कर आपने घर के दरबजे पर आके खरा हो गेया कुछ समय के बाद देखा उसके पत्नी बाहर से आ रही थी उसके बाल पूरा बिखरा हुए और उसके सारा शरीर खून से लिपटा हुए ।उसके पत्नी को देख तेई मुखिया चुप गेया उसने सारी रात बाहर रह गई शुवे उसीने किसीको भी बताया नही गांव से बाहर चला गई दूसरे गांव में।क्योंकि उसको पता था दूसरे गांव में एक तांत्रिक रहते हे जो उस जमाने के बहुत बड़ा बाबा था ।मुखिया ने बाबा के पास जाके सारी बाते बताई बाबा ने अपने तंत्र बल से सब कुछ देख लिऐ और बोला तुम मेरे पास बहुत देर में आया हो अगर कुछ दिन पहले आता तो में तुमारी पत्नी बांचा पता लिकिन अभी बचाना मुश्किल नही असाद्य हे ।बाबा ने कहा उसीके ऊपर काले डायन ने पूरा कब्जा कर लिया उसके शरीर में वो अभी जिंदा डायन बन गया उस के पास इतनी शक्ति हे किसी को भी पल भर में मार देगा उसके ऊपर कही देवी देवता का असर नही पड़ेगा।बाबा ने कहा सामने पूर्णिमा आने बाला हे उसके पहले   मार नही दिया तो सारे गांव को शमशान बना देगा।बाबा के बात को मान कर उसने उसके बीबी को घरमे जाकर घरके अंदर ही जला दिया ।मुखिया को इसके अंदाजा नही था इसके बाद केया होने बाला हे।गांव में दिन में काले अंधेरा छा गई और चारो तरफ काले बादल की साए जैसे लगा रहा था हजारों काली शक्ति अक्त्रीत हो रहा हे ।गांव बाला जब मुखिया ने सारे बात बताई तब गांव बाला से कही उस बाबा के पास जाकर बाबा को बुलाने के लिए चला गेया कुछ समय के बाद बाबा आया और बोला जहासे इसके शुरू हुई बोहा पर इसका अंत हे ।इसी लिए उसके पत्नी के लाश को उस कूए के अंदर दफना दिया।फिर परिवेश शांत हो गेया लिकिन काली रात के अंधेरा में मुखिया के पत्नी बिराज रहते हे और सामने जिसको मिलता हे उसिको मार देता हे ।ऐसे सुनने को मिला था मुखिया के पत्नी जिंदा डायन बना फिर उसके पेट में काली शक्ति वाले बच्चे की आत्मा थी ।किसी स्त्री के पेट में बच्चा रहते मरने से वो डायन बन जाते हे लिकिन मुखिया के पत्नी मरने से पहले जिंदा डायन थी ऊपर से पेट में बुरी आत्मा का बच्चा लेकर मारी इसी लिए बहुत शक्ति शाली डायन बन गई। आज भी उस गांव में डर से कही नही जाते हे।खास कर उस कुएं के तरफ तो बिल्कुल नही । दिनमे भी कुएं से रोने की शब्द और चिल्लाने चीखने की अाओजे आती हे।

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