ये बात काफी पुरानी है १९४३की घटना है,ये बात मेरे दादाजी ने मुझे बताया था । हमारे पड़ोस में एक किरायेदार रहा करते थे, उनकी सर्विस ” कलेक्ट्री” ऑफिस मे काम कर रहा था ।वो और उनका फैमिली के साथ रह रहा था । उनकी पत्नी ओर ५ बच्चे थे इस बजाय से उनके पत्नी और आंकेल के बीच हमेश झगड़ा हो रहा था।आंटी बहुत धार्मिक था कि जब भी कोई धार्मिक समारोह होता जैसे कोई साधू संत का प्रवचन होनाहो या कोई यज्ञ को, या फिर पडोसमेंकिसीके भी यहो भजन मंडली का कार्यक्रम हो तो उनकी पत्नी किसी भी समारोह में पुण्य कमाने का अवसर नहीं खोना चाहती थी इसी लिए वो जब भी किसी का बुलावा आता या कोई उसे साधु -संतो का प्रवचन होता आ तुरत वहां जाने के लिए तैयार हो जाती थी यही बात पति को अच्छी नहीं लगता था , क्योकि उनके इस तरह के बुलावो मे जाने से उनके दैनिक कार्यो में व्यवधान पडता था | ये तो सच बात हे , क्योकि पहली जिम्मेदारी हमारे घर की होती है बाद मेँ अन्य कार्यो कि ,लेकिन उनके पति हमेशा से नास्तिक नहीं थे, दादा जी बोल रहे थे जब भी वो किसी देव स्थान से गुजरते अपना सिर जरूर झुकाते थे इसी से हमने ये बात पता चलते हे ये अन्दर सो धार्मिक तो जरुर है,,,लेकिन इनके नास्तिक होने का कही कारण होगा ,क्योकि इंसान के कर्म ओर भाग्य दोनों एक साथ चलते है,.आप चाहे कितनी भी अच्छी किस्मत लिखा के क्यो न लाये हो फल तो कर्म के अनुसार ही मिलेगा... इनकी पत्नी को घर के मकान की बहुत लालसा रहती थी,ओर भाग्य ने साथ दिया ,कुछ दिनो में उनके दिक्कते दूर हो गई, ओर उन्होने अच्छा सा मकान बना लिया था, अब यहाँ से बात शुरू होती है ,उनकी पत्नी के कारण उन अंकल को पूजा,पाठ, ओर हवन शांति, गृह प्रवेश को बिलकुल सिरे से नकार दिया ओर घर मे शिफ्ट हो गए, उस घर मेँ जाते ही सबसे पहले तो उन अंकल को भगवान की तस्वीरे लगाते ही “किल ठोकने से गहरा जख्म हो गया ,ओर खून की धार जमीन पर गिर गई, घर में शिफ्ट होने के बाद वो कु कुछ समय के लिए कही बाहर चले गए, वापस आये तो उनके साथ अजीब बाते होने लगी,,, उनको रातमें कभी- एसा महसूस होता की कोई उनके पास से होकर सिडियो की तरफ जा रहा है , तो कभी उनको नींद में एेसा लगता की किसी की आने की आवाजे आराही हे और कभी लगता हे उनको किसीने बुला रही हे। अब इस तरह उनको २-३ महीने बीत गई,कूची दिनो में अंकल की तबीयत खराब हो गयी और जब मेडिकल में गई डॉक्टर दिखाने के लिए तब डॉक्टर दावा दे रहे थे लिकिन दावा का कही असर नही पर रहा था फिर अंकल परिषण हो गई,लेकिन वो अंकल अपनी पत्नी से कहते की मुझे बहुत घुटन महसूस हो रही है, ओर मन भी खराब हो रहा है, वो अपनी पत्नी से बोलते पता नहीं मुझे कुछ दिनो से जब खाना बनाने रसोई घर में जाता हु अचानक बर्तन गिरने का आवाजे अति हे। बार -बार एेसा लग रहा था साइड हवा की बजाय से ऐसा हो रही हे।समय निकलता रहा,,,उनके परिवार में तकलीफे भी बड़ते गेया। धीरे-धीरे परिवार मे सभी सदस्य उदास-होने लगा। उनके घर पर कोई भी उनसे मिलने के लिए जाता तो यही कहता उनके यहाँ तो जाते ही एसा महसूस होता है जैसे कोई मर गया हो ओर उसको जलाने कि तैयारी मे गए हो, ओर घुटन सी भी ओर रोने जैसी हालत हो जाती है,,, इसलिए दादा जी भी उनके वहाँ ज्यादा नहीं जाते थे।दोस्तों हम, कहते हँ न की अच्छे कर्मो का फल हमेशा मिलता है हम तो शायद ये उनकी पत्नी के अच्छे कर्मो का ही फल मानते है की एक दिन एक साधु बाबा वाला जिसको हम लोग (नागा) भी कहते है उधर से गुजर जर रहा था, तो उनके बच्चे बाहर ही बैठे थे, अचानक दरवाजे के पास आकर रुका ओर बच्चे को थोड़ी देर देखने के बाद कहा बेटा तुम्हारी मम्मी को बुलाओ , बच्चा अन्दर जाकर बोला मम्मी कोई मांगने वाला आया है आपको बुलाने के लिए कह रहा है.... उस बच्चे की मम्मी को देखकर नागा बाबा,बाबा बोला,,, तुम तूम्हारे बच्चे का ध्यान रखना ,इसके साथ कोई दुर्घटना होन वाली है, वो बोली क्या दुर्घटना वाली है, वो बोला तुम उसे रोक नहीं सकते जो होना वो तो होकर रहेगा हम उसे नहीं रोक सकते है , पर जितना जल्दी हो सके इस मकान को छोड दो... या फिर इस घर मे हनुमान चालीसा पाठ ओर दुर्गा सप्तशती का ९ दिन तक अखंड पाठ करा लेना नही तौ तुम यहाँ चैन से नहीं रह पाओगे ओर कुछ भी हो सकता है,,, वो साधु बाबा चला गया,, उसके थोडी देर बाद बच्चे की मां ने उसे पास की दुकान से कुछ लाने के लिए भेजा, जो रोड के उस पार थी तो वो बच्चा जब सामान लेकर आ रहा था तो उसको किसी साइकल वाले पीछे से धक्का लगा दी। बच्चे की कुछ नही हुए था तोडा चोट लगा और ठीक हो गेया।
अब जबसे वो साधु बाबा बोल कर गया तब से वो घर मे बेचनी सी फैल गई, फिर उन आंटी ने वहाँ हनुमान चालीसा पाठ ओर सप्तशती चंडी का पाठ कराने की सोच ली लेकिन जब भी इसका नाम लेते तो उनके पति फिर
से इन सभी चीजों को नकारते रहते,उनकी पत्नी की स्तिथि एसी हो गई जैसे एक तरफ वावा एक तरफ खाई ओर बीच मेँ शेर....... एक तरह से देखा जाए तो जब भी इस घर कै शुद्धिकरण की बात आती तो हमेशा नकारात्मक सोच ही उभर के आती थी,, एक दिन उन अंकल के कोई रिश्तेदार वह मिलने आये जौ भजन किर्तन में व्यस्त रहते थे, उन्होने भी जब वो जाने लगे तो वो बोले तुम ये मकान जल्दी से छोड दो नहीं तो कुछ भी हो सकता है मुद्धे यहाँ कुछ अच्छा नहीं लग रहा है... फिर काफी जनों की राय लेने के बाद उनको वो घर छोड़ना ही पडा, अंकल आंटी घर को छोड़के उनके मायके पास चला गया। फिर कुछ महीनों बाद वो आंटी गांव में एक बुजूर्ग महिला से बाते कर रही थी बो महिला गांव का सबसे जडा उम्र बाला बूढ़ी थी। बातोँ-बातों मे उस मकान की जिक्र चला तो उन बूढ़ी ने बताया की यहाँ पर पहले गांव में कही बच्चा मरने से इस जगा पड़ दफना दिया करती थी।और बहुत लोगो को भी इस जगा पड़ दफनाया पहले। इस जगा पर पहले एक झोपड़ी का घर बनाके एक फैमिली रह रहा था अचानक सबका एक साथ मत हो गेया। बूढ़ी ने बोला तुम लोग जब घर बना रही थी हमने सोचा क्यों न हम एक बार माना कर देंगे लिकिन जिससे जमीन खरीद किया हो तुम लोग उसको अगर पता चलेगा हम ने माना कर दिया तो हमारी घर के साथ झगड़ा हो जाती इसी बजाय से हमने कुछ नही बोला। बूढ़ी ने बताया तुमरी किस्मत अच्छी हे इसीलिए सय्यद कुछ नुकसान हो नही पाया।दोस्तों एक बात सच है इश्वर प्रति आस्था और बिस्वास होने से भगवान किसी ना किसी रूप में आकर बांचा लेती हे।और एक बात सच हे हमेशा भगवान भी साथ नहीं देता हे कुछ समय के बेबधान के लिए इसीलिए जब कही मकान घर बनाने के तैयार होंगे तब उस जमीन को ठीक से परख लेंगे नही तो ये किसके साथ भी हो सकते हे। ।

